श्री कृष्णा उद्धव से कहते हैं

 
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स्वर्ग तथा नरक दोनों ही के निवासी पृथ्वीलोक पर मनुष्य का जन्म पाने की आकांक्षा रखते हैं क्योंकि मनुष्य-जीवन दिव्य ज्ञान तथा भगवद् प्रेमकी प्राप्ति को सुगम बनाता हैं, जबकि ना तो स्वर्गिक, ना ही नारकीय शरीर पूर्णतःऐसा अवसर सुलभ करते हैं | (SB: 11.20.12)

तात्पर्य:

स्वर्ग में मनुष्य असामान्य इंद्रियतृप्तिमें लीं हो जाता हैं और नर्क में वह कष्ट में डूबा रहता हैं| दोनो ही स्थितियो में दिव्यज्ञान या भगवद् प्रेम प्राप्त करने के लिए तनिक भी प्रोत्साहन नही मिलता| इस तरह अत्यधिक कष्ट या अत्यधिक भोग आद्धयात्मिक प्रगती में बाधक हैं|

 

 

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