Gita Saar

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हे अर्जुन! तू जो कर्म करता है, जो खाता है, जो हवन करता है, जो दान देता है और जो तप करता है, वह सब मेरे अर्पण कर॥ इस प्रकार, जिसमें समस्त कर्म मुझ भगवान के अर्पण होते हैं- ऐसे संन्यासयोग से युक्त चित्तवाला तू शुभाशुभ फलरूप कर्मबंधन से मुक्त हो जाएगा और उनसे मुक्त होकर मुझको ही प्राप्त होगा।
O son of Kunti, all that you do, all that you eat, all that you offer and give away, as well as all austerities that you may perform, should be done as an offering unto Me.In this way you will be freed from all reactions to good and evil deeds, and by this principle of renunciation you will be liberated and come to Me.


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