Shrimad Bhagvatam‬

अन्य लोग भी जो कि दिव्य आत्म-साक्षात्कार द्वारा शांत हो जाते हैं तथा जिन्होंनेप्रबल शक्ति ऐवम ज्ञान के द्वारा प्रकृति के गुणों पर विजय पा ली है, आप में प्रवेश करते हैं, किंतु उन्हें काफ़ी कष्ट उठाना पड़ता है, जबकि भक्त केवल भक्ति-मय सेवा संपन्न करता है और उसे ऐसा कोई कष्ट नहीं होता |

हे प्रभु, जो लोग अपनी गंभीर मनोवृत्ति के कारण प्रबुद्ध भक्तिमय सेवा की अवस्था प्राप्त करते हैं, वे वैराग्य तथा ज्ञान के संपूर्ण अर्थ कोसमझ लेते हैं और आपकी कथाओं के अमृत को पीकर ही अध्यात्मिक आकाश में वैकुंठलोक को प्राप्त करते हैं | [SB: 3.5.46]
O Lord, persons who, because of their serious attitude, attain the stage of enlightened devotional service achieve the complete meaning of renunciation and knowledge and attain the Vaikuṇṭhaloka in the spiritual sky simply by drinking...

हे प्रभु, आपके चरणकमल शरणागतों की संसार के समस्त कष्टों से उनकी रक्षा करते हैं | सारे मुनिगण उस आश्रय के अंतर्गत समस्त भौतिक कष्टों को निकाल फेंकते हैं | [SB: 3.5.39]
The demigods said: O Lord, Your lotus feet are like an umbrella for the surrendered souls, protecting them from all the miseries of material existence. All the sages under that shelter throw off all material miseries. We therefore offer our respectful obeisances unto Your lotus feet.

समस्त जीवों के स्वामी, भगवान सृष्टि के पूर्व अद्वय रूप में विद्यमान थे | केवल उनकी इच्छा से ही यह सृष्टि संभव है और सारी वस्तुएँ पुनः उनमें लीन हो जाती हैं | इन परम पुरुष को विविध नामों से उपलक्छित किया जाता है |
[SB: 3.5.23]
The Personality of Godhead, the master of all living entities, existed prior to the creation as one without a second. It is by His will only that creation is made possible and again everything merges in Him. This Supreme Self is symptomized by differe...