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गुरु समान दाता नही, याचक सीष समान |
तीन लोक की संपदा, सो गुरु दीनी दान ||

जब भाग्य ज़ोर करे तब संत का दर्शन होवे और पुण्य और ज़ोर करे तब संत का वचन सुनने को मिले | पापी आदमी संत का वचन नहीं सुन सकता | जिसके अंदर में पाप बैठा है, संत को देखते ही उसका पाप उसको भगा कर ले जायेगा | अगर वह नहीं भागे तो पाप अकेला भाग जायेगा और वह पुण्यत्मा हो जायेगा |
सत्संग की ऐसी महिमा है |
जै गुरुजी....

सेवा करनी है तो, घड़ी मत देखो !
प्रसाद लेना है तो स्वाद मत देखो !
सत्संग सुनना है तो, जगह मत देखो !
विनती करनी है तोस्वार्थ मत देखो !
समर्पण करना है तो खर्चा मत देखो !...

हम भूलते हैं तो आप बख्शते हो ,
हम डूबते हैं तो आप तारते हो,
हम गिरते हैं तो आप उठाते हो,
हम भटकते हैं तो आप समझाते हो,
हम तो आपके पैरों की धूल के लायक भी नहीं, ...