‎Radhe‬ ‪

माया के गुणों से मोहग्रस्त होने पर अज्ञानी पुरुष पूर्णतया भौतिक कार्यों में संलग्न रहकर उनमें आसक्त हो जाते हैं | यद्यपि उनके ये कार्य उनमें ज्ञानभाव के कारण अधम होते हैं, किन्तु ज्ञानी को चाहिए कि उन्हें विचलित न करे |
Bewildered by the modes of material nature, the ignorant fully engage themselves in material activities and become attached. But the wise should not unsettle them, although these duties are inferior due to the performers' lac...

हे महाबाहो! भक्तिभावमय कर्म तथा सकाम कर्म के भेद को भलीभाँति जानते हुए जो परमसत्य को जानने वाला है, वह कभी भी अपने आपको इन्द्रियों में तथा इन्द्रियतृप्ति में नहीं लगाता |
One who is in knowledge of the Absolute Truth, O mighty-armed, does not engage himself in the senses and sense gratification, knowing well the differences between work in devotion and work for fruitive results....

जिसकी चेतना माया से मोहित होती है, वह भौतिक वस्तुओं के मूल्य तथा अर्थ में अनेक अंतर देखता है | इस प्रकार वह भौतिक अच्छाई तथा बुराई के स्तर पर निरंतर लगा रहता है और ऐसी धारणाओं से बँधा रहता है |
जो भौतिक अच्छाई तथा बुराई को लाँघ चुका होता है, वह स्वतः धार्मिक आदेशों के अनुसार कार्य करता है और वर्जित कार्यों से बचता है | स्वरूपसिद्ध व्यक्ति वह सब अबोध बालक की तरह अपने आप करता है वरन इसलिय नहीं कि वह भौतिक भौतिक अच्छाई तथा बुराई के रूप से सोचता रहता है |

हे प्रभु, जो लोग अपनी गंभीर मनोवृत्ति के कारण प्रबुद्ध भक्तिमय सेवा की अवस्था प्राप्त करते हैं, वे वैराग्य तथा ज्ञान के संपूर्ण अर्थ कोसमझ लेते हैं और आपकी कथाओं के अमृत को पीकर ही अध्यात्मिक आकाश में वैकुंठलोक को प्राप्त करते हैं | [SB: 3.5.46]
O Lord, persons who, because of their serious attitude, attain the stage of enlightened devotional service achieve the complete meaning of renunciation and knowledge and attain the Vaikuṇṭhaloka in the spiritual sky simply by drinking...