‎Radhe

भगवद् भक्ति में शुद्धता का होना अति आवश्यक है, शुद्धता दो प्रकार की होती है बाहरी और आंतरिक शुद्धता | बाहरी शुद्धता का अभिप्राय शरीर की शुद्धता है तथा आंतरिक शुद्धता के लिए मनुष्य को कृष्ण का चिंतन निरंतर करना चाहिए जो की हमारे पूर्व जन्मों के पापों को नष्ट करता है और हमारी इंद्रियों को शुद्ध करता है | इस प्रकार हमारी आसक्ति विषयासक्त मनुष्यों के समुदाय में नहीं रहती |....

भगवद् भक्ति में शुद्धता का होना अति आवश्यक है, शुद्धता दो प्रकार की होती है बाहरी और आंतरिक शुद्धता | बाहरी शुद्धता का अभिप्राय शरीर की शुद्धता है तथा आंतरिक शुद्धता के लिए मनुष्य को कृष्ण का चिंतन निरंतर करना चाहिए जो की हमारे पूर्व जन्मों के पापों को नष्ट करता है और हमारी इंद्रियों को शुद्ध करता है | इस प्रकार हमारी आसक्ति विषयासक्त मनुष्यों के समुदाय में नहीं रहती |....

Arjuna, Karna, Drona and Bhishma were four strong characters before Lord Krishna to execute his plan. But why only Arjuna ? Why not those who were even stronger and better warrior than Arjuna i.e. Karna, Acharya drona & Pitamah bhishma.?
All four men were great in their own way, but three of them failed in doing what is truly right and therefore came to futile ends, their lives n....

किन्तु जो अज्ञानी तथा श्रद्धाविहीन व्यक्ति शास्त्रों में संदेह करते हैं, वे भगवद्भावनामृत नहीं प्राप्त करते, अपितु नीचे गिर जाते है | संशयात्मा के लिए न तो इस लोक में, न ही परलोक में कोई सुख है |
But ignorant and faithless persons who doubt the revealed scriptures do not attain God consciousness. For the doubting soul there is happiness neither in this world nor in the next....