‎ISKCON‬

आज कान्हा जी की मुस्कान रोके नहीं रुक रही...अकेले ही महल की छत पर बैठे हुए कृष्ण... दूर आकाश में चाँद को निहारते जा रहे हैं... और मंद मंद मुस्कुराते जा रहे हैं...कान्हा जी बार बार पीछे मुड़ के देख भी लेते हैं...की कोई उन्हें देख तो नहीं रहा... और फिर अनायास ही , अपने ख्यालों में खोकर मुस्कुराने लगते हैं...और उसी समय अर्जुन वहां पर आ आ गये... अपने सखा कृष्ण को अकेले में मुस्कुराता देखकर ...अर्जुन ने उनके आनंद में विघ्न डालना उचित ना समझा ...और चुपचाप एकांत में खड़े होकर भगवान्....

Krishna and Arjuna]“But you cannot see Me with your present eyes. Therefore I give to you divine eyes by which you can behold My mystic opulence....

Bhakti, devotional service, dissolves the subtle body of the living entity without....

“My dear Lord, one who earnestly waits for You to bestow Your causeless mercy upon him, all the while patiently suffering the reactions of his past misdeeds and offering You respectful obeisances with his heart....