‎BhagvadGita‬

जो मुझ परमेश्र्वर को मेरी पूर्ण चेतना में रहकर मुझे जगत् का, देवताओं का तथा समस्त यज्ञविधियों का नियामक जानते हैं, वे अपनी मृत्यु के समय भी मुझ भगवान् को जान और समझ सकते हैं |
Those who know Me as the Supreme Lord, as the governing principle of the material manifestation, who know Me as the one underlying all the demigods and as the one sustaining all sacrifices, can, with steadfast mind, understand and know Me even at the time of dea...

मैं मूर्खों तथा अल्पज्ञों के लिए कभी भी प्रकट नहीं हूँ | उनके लिए तो मैं अपनी अन्तरंगा शक्ति द्वारा आच्छादित रहता हूँ, अतः वे यह नहीं जान पाते कि मैं अजन्मा तथा अविनाशी हूँ |
I am never manifest to the foolish and unintelligent. For them I am covered by My eternal creative potency [yoga-māyā]; and so the deluded world knows Me not, who am unborn and infallible....

जिनकी बुद्धि भौतिक इच्छाओं द्वारा मारी गई है, वे देवताओं की शरण में जाते हैं और वे अपने-अपने स्वभाव के अनुसार पूजा विशेष विधि-विधानों का पालन करते हैं |
Those whose minds are distorted by material desires surrender unto demigods and follow the particular rules and regulations of worship according to their own natures....

हे भरतश्रेष्ठ! चार प्रकार के पुण्यात्मा मेरी सेवा करते हैं – आर्त, जिज्ञासु, अर्थार्थी तथा ज्ञानी |
O best among the Bhāratas [Arjuna], four kinds of pious men render devotional service unto Me-the distressed, the desirer of wealth, the inquisitive, and he who is searching for knowledge of the Absolute....