Article February 9, 2017

एक बार एक बहुत ही पहुंचे हुए संत महात्मा बीमार हो गए, काफी वेध हकीम उनके इलाज कर चुके पर उनको आराम नही हुआ ।*
*उनके एक बहुत ही प्रिय शिष्य तो उनके चरणो में हताश हो कर बैठ गया । महात्मा ने उसकी और प्रेम से देखा और कहा निराशा न हो पुत्र सब ठीक हो जायेगा ।*
*लेकिन वो शिष्य बोला प्रभु आप तो सर्व शक्तिमान हो, सर्व ज्ञाता हो । आप तो सब कुछ जानते हो । फिर आप क्यों नि उस परमात्मा से फरियाद करते हो कि वो आपको ठीक कर दे ।*
*इस पर महात्मा मुस्कुरा कर बोले पुत्र, क्या प्रभु को मेरी इस अवस्था का ज्ञान नही हैं ।*
*क्या मेरी ये अवस्था उसकी मर्जी के बिना हैं ।*
*तो में उसकी मर्जी में क्यों विघन डालूं ।*
*जरुर किसी बुरे करम का भुगतान करवाया जा रहा हैं । जब भुगतान हो जायेगा तो वो बीमारी भी खुद ठीक कर देगा ।*
*इंसान को विवेक से काम लेना चाहिए । प्रभु जो करा हैं सब अच्छे के लिए ही करता हैं।*

 

*।। श्रीराम: शरणम ।।*

 

श्रीराम: शरणम ।।

*भजन*

संसार के लोगों से आशा ना किया करना,
जब कोई ना हो अपना, श्री राम कहा करना।

राम राम राम राम

जीवन के समुन्दर में, तूफ़ान भी आतें हैं,
जो हरि को भजतें हैं, हरि आप बचाते हैं

वो आप ही आएंगे, बस याद किया करना,
जब साथ ना दे कोई, श्री राम जपा करना

यह सोच अरे बन्दे, प्रभु तुझ से दूर नहीं,
कोई कष्ट हो भगतों को, प्रभु को मंजूर नहीं।

भगवान को आता है, भगतों पे दया करना,
जब कोई ना हो अपना, श्री राम कहा करना॥

मत भूल अरे भैया, यह देश बेगाना है,
दुनिया में आ कर के, वापस तुझे जाना है।

माया के बंधन से दिन रात बचा करना,
जब कोई ना हो अपना, श्री राम कहा करना॥

द्रोपदी ने पुकारा था, प्रभु भी बेचैन हुए,
वो चीर बढ़ाने को, खुद चीर में प्रगट हुए।

वोही लाज बचाएंगे, बस ध्यान किया करना,
जब कोई ना हो अपना, श्री राम कहा करना॥

*राम राम राम राम राम राम राम राम*

नियतं सङ्‍गरहितमरागद्वेषतः कृतम।अफलप्रेप्सुना कर्म यत्तत्सात्त्विकमुच्यते॥

भावार्थ : जो कर्म शास्त्रविधि से नियत किया हुआ और कर्तापन के अभिमान से रहित हो तथा फल न चाहने वाले पुरुष द्वारा बिना राग-द्वेष के किया गया हो- वह सात्त्विक कहा जाता है ॥23॥