Article September 19, 2016

गुरुजी के श्री चरणों में शत-शत नमन......

राम जपो जी ऐसे ऐसे; ध्रुव प्रहलाद जापयो हर जैसे

 

ढीन दयाल भरोसे तेरे; सभ परवार चड़ाया बेड़े

 

जा तीस भावे ता ःउकम मनावे; एस बेड़े को पार लगावे 

 

गुर परसाद ऐसी बुध समानी; चूक गया फिर आवाँ जानी

 

कह कबीर भाज सारीगापानी; औरवा पार सब अेको दानी

 

मम योनिर्महद्ब्रह्म तस्मिन्गर्भं दधाम्यहम्‌ । 
सम्भवः सर्वभूतानां ततो भवति भारत ॥

भावार्थ : हे अर्जुन! मेरी महत्‌-ब्रह्मरूप मूल-प्रकृति सम्पूर्ण भूतों की योनि है अर्थात गर्भाधान का स्थान है और मैं उस योनि में चेतन समुदायरूप गर्भ को स्थापन करता हूँ। उस जड़-चेतन के संयोग से सब भूतों की उत्पति होती है॥3॥

To whatever realm we attach the mind, we will attain the property of that realm.  If we attach it to God, we will attain His Divine property of unlimited Knowledge and Bliss.  Many souls loved Shree Krishna selfishly, not knowing Him to be God.

गोप्यः कामात् भयात्कंसो द्वेषाच्चैद्यादयो नृपाः ।