Article September 12, 2016

गहो रे मन ! श्याम चरण शरणाई ।

अंत समय कोउ काम न अइहैं मात पिता सुत भाई ।

काम क्रोध अरु लोभ मोह मद इन सों कछु न बसाई ।

यह जग मृग तृष्णा सम दिखत सुख लवलेश न पाई ।

धन यौवन तन छन भंगुर सब ज्यों कपूर उडि जाई ।

बहुरि 'कृपालु' न नर तनु पाइय बिगरी लेहु बनाई ॥
(Prem Ras Madira)

उठे हरि, नैनन नींद भरे ।

अति रस भरे नैन रतनारे डोरन अरुन परे ।

खँजन मीन चकोर ठगे से देखत नैन खरे ।

खुलत न नैन मैन मदमाते जनु असि म्यान धरे ।

श्यामगात जँभुवात मूँदि दृग मातृ स्वकर पकरे ।

डगमगात पग धरत धरणि पर बिच-बिच दृग उघरे ।

लखतिहं बनत ुकृपालु लाल छवि बरबस स्वबस करे ॥

(Prem Ras Madira)

निज तन से सेवा करे , सन्त न मानत ताप ।
साझी को डाटा तुरंत ,अनन्ताचार्य आप ।।

Jai Guru Ji

*सारे जगत को देने वाले*
*मैं क्या तुझको भेंट चढ़ाऊँ,*
*जिसके नाम से आए खुशबू*
*मै क्या उसको फूल चढ़ाऊँ !!.*

Jai Guru Ji

*सारे जगत को देने वाले*
*मैं क्या तुझको भेंट चढ़ाऊँ,*
*जिसके नाम से आए खुशबू*
*मै क्या उसको फूल चढ़ाऊँ !!.*
गुरुजी के श्री चरणों में शत-शत नमन....

 

भावार्थ : जिस क्षण यह पुरुष भूतों के पृथक-पृथक भाव को एक परमात्मा में ही स्थित तथा उस परमात्मा से ही सम्पूर्ण भूतों का विस्तार देखता है, उसी क्षण वह सच्चिदानन्दघन ब्रह्म को प्राप्त हो जाता है॥30॥

 

यदा भूतपृथग्भावमेकस्थमनुपश्यति ।
तत एव च विस्तारं ब्रह्म सम्पद्यते तदा ॥

The Vedas say that Indra went to God but God disappeared before Indra’s arrival.  Poor Indra did not have an opportunity to behold God or to speak with Him, while his servants did.  In the same spot where God had appeared,

स तस्मिन्नेवाकाशे स्त्रियमाजगाम बहुशोभमानां हैमवतीं उमाम्