Article February 12, 2016

आज कान्हा जी की मुस्कान रोके नहीं रुक रही...अकेले ही महल की छत पर बैठे हुए कृष्ण... दूर आकाश में चाँद को निहारते जा रहे हैं... और मंद मंद मुस्कुराते जा रहे हैं...कान्हा जी बार बार पीछे मुड़ के देख भी लेते हैं...की कोई उन्हें देख तो नहीं रहा... और फिर अनायास ही , अपने ख्यालों में खोकर मुस्कुराने लगते हैं...और उसी समय अर्जुन वहां पर आ आ गये... अपने सखा कृष्ण को अकेले में मुस्कुराता देखकर ...अर्जुन ने उनके आनंद में विघ्न डालना उचित ना समझा ...और चुपचाप एकांत में खड़े होकर भगवान्....

जो मुझ परमेश्र्वर को मेरी पूर्ण चेतना में रहकर मुझे जगत् का, देवताओं का तथा समस्त यज्ञविधियों का नियामक जानते हैं, वे अपनी मृत्यु के समय भी मुझ भगवान् को जान और समझ सकते हैं |
Those who know Me as the Supreme Lord, as the governing principle of the material manifestation, who know Me as the one underlying all the demigods and as the one sustaining all sacrifices, can, with steadfast mind, understand and know Me even at the time of dea...

Krishna and Arjuna]“But you cannot see Me with your present eyes. Therefore I give to you divine eyes by which you can behold My mystic opulence....

जिस कै अंतरि राज अभिमानु ॥
सो नरकपाती होवत सुआनु ॥
English:
He, whose mind is the pride of kingship,
Becomes a hell dweller and a dog....