Article November 12, 2015

ऐसा मुक्त पुरुष भौतिक इन्द्रियसुख की ओर आकृष्ट नहीं होता, अपितु सदैव समाधि में रहकर अपने अन्तर में आनन्द का अनुभव करता है | इस प्रकार स्वरुपसिद्ध व्यक्ति परब्रह्म में एकाग्रचित्त होने के कारण असीम सुख भोगता है |
Such a liberated person is not attracted to material sense pleasure or external objects but is always in trance, enjoying the pleasure within. In this way the self-realized person enjoys unlimited happiness, for he concentrate....

The story goes that Hanuman was sent by Rama to Ayodhya the day before Rama’s arrival as prearranged with Bharat to let the residents of Ayodhya know how Sita and Rama and all Their retinue were returning.

This was five days before Diwali, and after the Vijaya dasami (victory of Rama ) celebration....

जो न तो प्रिय वस्तु को पाकर हर्षित होता है और न अप्रिय को पाकर विचलित होता है, जो स्थिरबुद्धि है, जो मोहरहित और भगवद्विद्या को जानने वाला है वह पहले से ही ब्रह्म में स्थित रहता है |
A person who neither rejoices upon achieving something pleasant nor laments upon obtaining something unpleasant, who is self-intelligent, unbewildered, and who knows the science of God, is to be understood as already situated in Transcendence....

नरक चतुर्दशी का त्योहार हर साल कार्तिक कृष्ण चतुदर्शी को यानी दीपावली के एक दिन पहले मनाया जाता है। इस चतुर्दशी तिथि को छोटी दीपावाली के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन प्रातः काल स्नान करके यम तर्पण एवं शाम के समय दीप दान का बड़ा महत्व है।....

इतनी कृपा हम पर बनाये रखना
"गुरूजी"
जो रास्ता सही हो...उस पर चलाये रखना
"गुरूजी"....

Bhakti is intense devotion and supreme attachment to God. It is the spontaneous outpouring of love towards God. It is pure, unselfish, Divine Love or Suddha Prem.
It is a purest form of emotional exchange between a devotee and lord....

जिनके मन एकत्व तथा समता में स्थित हैं उन्होंने जन्म तथा मृत्यु के बन्धनों को पहले ही जीत लिया है | वे ब्रह्म के समान निर्दोष हैं और सदा ब्रह्म में ही स्थित रहते हैं |
Those whose minds are established in sameness and equanimity have already conquered the conditions of birth and death. They are flawless like Brahman, and thus they are already situated in Brahman....

हम क्या मांगे तुम से तुम अन्तर्यामी हो,
किसको क्या देना है तुम सब के स्वामी हो,
तेरी ही रजा में रहे ये,...