Article October 23, 2015

Rama-returning-to-Ayodhya
Janaka Maharaja had given the definition of bhakti to Lord Rama's brother, Bharata. "Anyabhilasita-sunyam, jnana-karmady-anavrtam, anukulyana krsnanu-silanam bhaktir uttama. One who has no other desire than to please Krsna, and who is not influenced by the process of jnana-marga (cultivation of knowledge) karma, and so on, is situated in pure bhakti. The king told him that nothing can control prema (pure love of God); i....

हे प्रभु आपके भक्तगण प्रामाणिक श्रवण विधि द्वारा कानों के माध्यम से आपको देख सकते हैं और इस तरह उनके हृदय विमल हो जाते हैं तथा आप वहाँ पर अपना स्थान ग्रहण कर लेते हैं | आप अपने भक्तों पर इतने दयालु हैं कि आप अपने को उस अध्यात्म के विशेष नित्य रूप में प्रकट करते हैं जिसमें वे सदैव आपका चिंतन करते हैं | [SB: 3.9.11]
O my Lord, Your devotees can see You through the ears by the process of bona fide hearing, and thus their hearts become cleansed, and You take Your seat there. You....

गुरु समान दाता नही, याचक सीष समान |
तीन लोक की संपदा, सो गुरु दीनी दान ||

जो व्यक्ति अपने कर्मफलों का परित्याग करते हुए भक्ति करता है और जिसके संशय दिव्यज्ञान द्वारा विनष्ट हो चुके होते हैं वही वास्तव में आत्मपरायण है | हे धनञ्जय! वह कर्मों के बन्धन से नहीं बँधता |
Therefore, one who has renounced the fruits of his action, whose doubts are destroyed by transcendental knowledge, and who is situated firmly in the self, is not bound by works, O conqueror of riches....

The story of the killing of the ass-demon Dhenukasura by Balaramji in Taalvan carries important practical lessons for all of us. Balaramji is declared to be the original Spiritual Master. Radhanath Swami has compared our hearts with the Taalvan forest. The heart is a beautiful place, a place for Krishna to reside and perform His pastimes. The fruits of our heart which we are supposed to offer to Krishna are our propensity to love and t....

भगवान ने कहा : हे उद्धव, मेरे शुद्ध भक्तों की संगति करने से इंद्रियतृप्ति के सारे पदार्थों के प्रति आसक्ति को नष्ट किया जा सकता है | शुद्धि करने वाली ऐसी संगति मुझे मेरे भक्त के वश में कर देती है | कोई चाहे अष्टांग योग करे....

बड़ी किस्मत से पाया है सतगुरु तेरा साथ
मेरे सिर पर रखना अपना किरपा भरा हाथ
मेरा जीवन तेरे श्री चरणों में बीते....