Article October 9, 2015

जो व्यक्ति कृष्णभावनामृत में पूर्णतया लीन रहता है, उसे अपने आध्यात्मिक कर्मों के योगदान के कारण अवश्य ही भगवद्धाम की प्राप्ति होती है, क्योंकि उसमें हवन आध्यात्मिक होता है और हवि भी आध्यात्मिक होती है ।
A person who is fully absorbed in Kṛṣṇa consciousness is sure to attain the spiritual kingdom because of his full contribution to spiritual activities, in which the consummation is absolute and that which is offered is of the same spiritual...

हम भूलते हैं तो आप बख्शते हो ,
हम डूबते हैं तो आप तारते हो,
हम गिरते हैं तो आप उठाते हो,
हम भटकते हैं तो आप समझाते हो,
हम तो आपके पैरों की धूल के लायक भी नहीं, ...

री भगवान बोले-
मुझमें मन को एकाग्र करके निरंतर मेरे भजन-ध्यान में लगे हुए जो भक्तजन अतिशय श्रेष्ठ श्रद्धा से युक्त होकर मुझ सगुणरूप परमेश्वर को भजते हैं, वे मुझको योगियों में अति उत्तम योगी मान्य हैं॥
परन्तु जो पुरुष इन्द्रियों के समुदाय को भली प्रकार वश में करके मन-बुद्धि से परे, सर्वव्यापी, अकथनीय स्वरूप और सदा एकरस रहने वाले, नित्य, अचल, निराकार, अविनाशी, सच्चिदानन्दघन ब्रह्म को निरन्तर एकीभाव से ध्यान करते हुए भजते हैं, वे सम्पूर्ण भूतों के हित में रत और सबम....

जो पुरुष प्रकृति के गुणों के प्रति अनासक्त है और जो दिव्य ज्ञान में पूर्णतया स्थित है, उसके सारे कर्म ब्रह्म में लीन हो जाते हैं |
The work of a man who is unattached to the modes of material nature and who is fully situated in transcendental knowledge merges entirely into transcendence....

विभिन्न आसक्तियों से उत्पन्न होने वाले सभी प्रकार के कष्ट तथा बंधन में से ऐसा एक भी नहीं, जो स्त्रियों के प्रति अनुरक्ति तथा स्त्रियों के प्रति अनुरक्त रहने वालों के घनिष्ट संपर्क से बढ़कर हो....

मन की डोरी में यारा
पिरो ले गुरु नाम के मोती
बड़े हैं तेरे गुनाह,
ये ज़िंदगी बहुत है छोटी|
कमा ले उसके नाम की दौलत, ...