Article August 31, 2015

Parents teach their children using technology at an early age, similarly, Krishna consciousness should also start at an early age.
The mother is the first to teach and the teaching begins very early in life, even before the children can comprehend. I’ve seen this in Bangladesh. The Hindu women bring their little children—they can’t even walk or talk—and they will bring them and physically bow them down. They [the children] don’t know ....

जो पुरुष अव्यभिचारी भक्ति योग द्वारा मुझको निरन्तर भजता है, वह भी इन तीनों गुणों को भलीभाँति लाँघकर सच्चिदानन्दघन ब्रह्म को प्राप्त होने के लिए योग्य बन जाता है॥
क्योंकि उस अविनाशी परब्रह्म का और अमृत का तथा नित्य धर्म का और अखण्ड एकरस आनन्द का आश्रय मैं हूँ॥
One who engages in full devotional service, who does not fall down in any circumstance, at once transcends the modes of material nature and thus comes to the level of Brahman....

जब मन भगवान पर स्थिर हो जाता है, तो उसे वश में किया जा सकता है | स्थाई दशा को प्राप्त करके मन भौतिक कार्यों को करने की दूषित इच्छाओं से मुक्त हो जाता है | इस तरह सतोगुण के प्रबल होने पर मनुष्य रजो तथा तमोगुण का पूरी तरह परित्याग कर सकता है और धीरे धीरे सतोगुण से भी परे जा सकता है | [SB: 11.9.12]

The culmination and the highest most inclusive level of love between the Lord and His devotees is manifested in Vrindavan. Lord Krishna descends from Goloka Vrindavan to this material world once in a day of Brahma. When He told about His plan, to come to this world, Radharani said, “I cannot live without You and I want to come with You.” Sita was willing to leave Ayodhya to go into the forest for fourteen years to be with Rama and....

भगवान उद्धव से कहते है-- हे परम बुद्धिमान उद्धव, जीव मेरा विभिन्नांश है, किंतु अज्ञान के कारण वह अनादि काल से भौतिक बंधन भोग रहा है | फिर भी ज्ञान द्वारा वह मुक्त हो सकता है |....

सत्संग की महिमा
जब भाग्य ज़ोर करे तब संत का दर्शन होवे और पुण्य और ज़ोर करे तब संत का वचन सुनने को मिले | पापी आदमी संत का वचन नहीं सुन सकता | जिसके अंदर में पाप बैठा है, संत को देखते ही उसका पाप उसको भगा कर ले जायेगा | अगर वह नहीं भागे तो पाप अकेला भाग जायेगा और वह पुण्यत्मा हो जायेगा | सत्संग की ऐसी महिमा है |
जै गुरुजी

Srila Narrotam Das Thakura wrote in his prayers that in order to understand the loving pastimes of Radha and Krishna we should be humble and take shelter of the six Goswamis of Vrindavan. Srila Bhakti Siddhanta Saraswati Thakura would say, “Do not try to see Krishna, try to serve Krishna in such a way that Krishna is pleased to see you.”
Krishna reveals Himself according to the sincerity and the purity of our surrender....

अपने नियतकर्मों को दोषपूर्ण ढंग से सम्पन्न करना भी अन्य के कर्मों को भलीभाँति करने से श्रेयस्कर है | स्वीय कर्मों को करते हुए मरना पराये कर्मों में प्रवृत्त होने की अपेक्षा श्रेष्ठतर है, क्योंकि अन्य किसी के मार्ग का अनुसरण भयावह होता है |
It is far better to discharge one's prescribed duties, even though they may be faulty, than another's duties. Destruction in the course of performing one's own duty is better than engaging in another's d...

जिस समय इस देह में तथा अन्तःकरण और इन्द्रियों में चेतनता और विवेक शक्ति उत्पन्न होती है, उस समय ऐसा जानना चाहिए कि सत्त्वगुण बढ़ा है॥
हे अर्जुन! रजोगुण के बढ़ने पर लोभ, प्रवृत्ति, स्वार्थबुद्धि से कर्मों का सकामभाव से आरम्भ, अशान्ति और विषय भोगों की लालसा- ये सब उत्पन्न होते हैं॥....