Article August 24, 2015

Lord Krishna“One who has diverse energies and activities and a wonderful brain is known as the sahasra-shirshnah. This qualification is applicable only to the Personality of Godhead, Shri Krishna, and no one else.” (Shrila Prabhupada, Shrimad Bhagavatam, 3.13.5 Purport)
Only the Supreme Personality of Godhead has the combination of a wonderful brain that utilizes diverse energies and participation in diverse and wo....

हे प्रभु, संसार के लोग समस्त भौतिक चिंताओं से उद्दिग्न रहते हैं-- वे सदैव भयभीत रहते हैं | वे सदैव धन, शरीर तथा मित्रों की रक्षा करने का प्रयास करते हैं, वे शोक तथा अवैध इच्छाओं एवम साज-सामग्री से पूरित रहते हैं तथा लोभवश "मैं" तथा "मेरे" की नश्वरधारणाओं पर अपने दुराग्रह को आधारित करते हैं | जब तक वे आपके सुरक्षित चरणकमलों की शरण ग्रहण नहीं करते तब तक वे ऐसी चिंताओं से भरे रहते हैं |
O my Lord, the people of the world are .....

माया के गुणों से मोहग्रस्त होने पर अज्ञानी पुरुष पूर्णतया भौतिक कार्यों में संलग्न रहकर उनमें आसक्त हो जाते हैं | यद्यपि उनके ये कार्य उनमें ज्ञानभाव के कारण अधम होते हैं, किन्तु ज्ञानी को चाहिए कि उन्हें विचलित न करे |
Bewildered by the modes of material nature, the ignorant fully engage themselves in material activities and become attached. But the wise should not unsettle them, although these duties are inferior due to the performers' lac...

श्रेष्ठता के अभिमान का अभाव, दम्भाचरण का अभाव, किसी भी प्राणी को किसी प्रकार भी न सताना, क्षमाभाव, मन-वाणी आदि की सरलता, श्रद्धा-भक्ति सहित गुरु की सेवा, बाहर-भीतर की शुद्धि (सत्यतापूर्वक शुद्ध व्यवहार से द्रव्य की और उसके अन्न से आहार की तथा यथायोग्य बर्ताव से आचरणों की और जल-मृत्तिकादि से शरीर की शुद्धि को बाहर की शुद्धि कहते हैं तथा राग, द्वेष और कपट आदि विकारों का नाश होकर अन्तःकरण का स्वच्छ हो जाना भीतर की शुद्धि कही जाती है।) अन्तःकरण की स्थिरता और मन-इन्द्रियों सहित शरीर का निग्रह॥
The five great elements, false ego, intelligence, the unmanifested, the ten senses, the mind, the five sense objects, desire, hatred, happiness, distress, the aggregate, the life symptoms, and convictions-all these are considered, in summary, to be the field of activities and its interactions.

संत पुरुष अग्नि के ही समान, कभी प्रच्छन्न रूप में, तो कभी प्रकट रूप में दिखता है | असली सुख चाहने वाले बद्धजीवों के कल्याण हेतु संत-पुरुष गुरु का पूज्‍यनीय पद स्वीकार कर सकता है और इस तरह वो अग्नि के सदृश अपने पूजकों की बलियों को दयापूर्वक स्वीकार करके विगत तथा भावी पापों को भस्म कर देते हैं | [SB: 11.7.46]

Uddhav gopi story - shri krishna leela : Radhe Radhe, Gopi explain Uddhav what is love
Uddhav leela is very close to my heart.because it teaches that it is not mind but heart which is required for pure bhakti....

Does Krishna loves gopis more than mother Yashoda ?
August 23, 2013 by Giriraj Das
Hare Krishna..

सृजन शक्ति के लिए ब्रह्मा द्वारा भगवान की स्तुति : ब्रह्मा जी भगवान के साकार रूप की महिमा का वर्णन कर रहे हैं
पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान कृष्ण या उनके द्वारा विस्तार किया हुआ कोई भी दिव्य रूप सारे ब्राह्मांडो के लिए समान रूप से मंगलमय है | चूँकि आपने यह नित्य साकार रूप प्रकट किया है, जिसका ध्यान आपके भक्त करते हैं, इसलिय मैं आपको सादर नमस्कार करता हूँ | जिन्हें नरकगामी होना बदl है वे आपके साकार रूप की उपेक्षा करते हैं, क्योंकि वे लोग भौतिक विषयों की ही कल्पना करते रहते हैं | [S...

हे महाबाहो! भक्तिभावमय कर्म तथा सकाम कर्म के भेद को भलीभाँति जानते हुए जो परमसत्य को जानने वाला है, वह कभी भी अपने आपको इन्द्रियों में तथा इन्द्रियतृप्ति में नहीं लगाता |
One who is in knowledge of the Absolute Truth, O mighty-armed, does not engage himself in the senses and sense gratification, knowing well the differences between work in devotion and work for fruitive results....