Article August 17, 2015

Khadiravan is one of the forests where Krishna would often bring His cows for herding. Krishna, Balaramji alongwith all the other Gopas have performed many playful pastimes in the forest of Khadiravan. Here at Khadiravan, Krishna killed the gigantic duck demon, Bakasura. Sangam Kunda also known as Madhurya Kunda, the meeting place of Krishna and the Gopis is also situated in Khadiravan. At Sangam Kunda, Krishna and t....

भगवान श्री कृष्ण के दिव्य नाम,रूप इत्यादि के कीर्तन तथा श्रवण मात्र से मनुष्य की असीम कष्टप्रद अवस्थाएं शमित हो सकती हैं | अतैव उनके विषय में क्या कहा जाए, जिन्होंने भगवान के चरणकमलों की धूल की सुगंध की सेवा करने के लिए आकर्षण प्राप्त कर लिया हो ?
[SB: 3.7.14]
Simply by chanting and hearing of the transcendental name, form, etc., of the Personality of Godhead, Śrī Kṛṣṇa, one can achieve the cessation of unlimited miserable conditions. Therefore what to speak of those who have...

हे पृथापुत्र! तीनों लोकों में मेरे लिए कोई भी कर्म नियत नहीं है, न मुझे किसी वस्तु का अभाव है और न आवश्यकता ही है | तो भी मैं नियत्कर्म करने में तत्पर रहता हूँ |
O son of Pṛthā, there is no work prescribed for Me within all the three planetary systems. Nor am I in want of anything, nor have I need to obtain anything-and yet I am engaged in work....

जो पुरुष सब भूतों में द्वेष भाव से रहित, स्वार्थ रहित सबका प्रेमी और हेतु रहित दयालु है तथा ममता से रहित, अहंकार से रहित, सुख-दुःखों की प्राप्ति में सम और क्षमावान है अर्थात अपराध करने वाले को भी अभय देने वाला है तथा जो योगी निरन्तर संतुष्ट है, मन-इन्द्रियों सहित शरीर को वश में किए हुए है और मुझमें दृढ़ निश्चय वाला है- वह मुझमें अर्पण किए हुए मन-बुद्धिवाला मेरा भक्त मुझको प्रिय है॥....

जिसकी चेतना माया से मोहित होती है, वह भौतिक वस्तुओं के मूल्य तथा अर्थ में अनेक अंतर देखता है | इस प्रकार वह भौतिक अच्छाई तथा बुराई के स्तर पर निरंतर लगा रहता है और ऐसी धारणाओं से बँधा रहता है |
जो भौतिक अच्छाई तथा बुराई को लाँघ चुका होता है, वह स्वतः धार्मिक आदेशों के अनुसार कार्य करता है और वर्जित कार्यों से बचता है | स्वरूपसिद्ध व्यक्ति वह सब अबोध बालक की तरह अपने आप करता है वरन इसलिय नहीं कि वह भौतिक भौतिक अच्छाई तथा बुराई के रूप से सोचता रहता है |

Last night I was having a discussion with a fellow vaisnava, and the following, important sloka, came up in the course of our conversation. I was reminded of a story that once Gurukrpa Swami asked Srila Prabhupada what was the most important sloka in our literature, and Srila Prabhupada responded....

Guru means “one who is heavy with knowledge”, able to destroy the suffering of a disciple with spiritual knowledge. This is the Sanskrit definition. Because the transcendental realm is beyond our immediate vision, neccessarily we must therefore learn about it, initially, by hearing from those who have realized that realm. That is Guru....

अन्य लोग भी जो कि दिव्य आत्म-साक्षात्कार द्वारा शांत हो जाते हैं तथा जिन्होंनेप्रबल शक्ति ऐवम ज्ञान के द्वारा प्रकृति के गुणों पर विजय पा ली है, आप में प्रवेश करते हैं, किंतु उन्हें काफ़ी कष्ट उठाना पड़ता है, जबकि भक्त केवल भक्ति-मय सेवा संपन्न करता है और उसे ऐसा कोई कष्ट नहीं होता |

महापुरुष जो जो आचरण करता है, सामान्य व्यक्ति उसी का अनुसरण करते हैं | वह अपने अनुसरणीय कार्यों से जो आदर्श प्रस्तुत करता है, सम्पूर्ण विश्र्व उसका अनुसरण करता है |
Whatever action is performed by a great man, common men follow in his footsteps. And whatever standards he sets by exemplary acts, all the world pursues....