Article August 14, 2015

Antardvipa is one of the nine islands of Sri Navadvipa Dham. Each of the nine islands represents nine stages of devotional service. This island is exemplification of “Atma Nivedan” – complete surrender unto the Lord. This is the highest stage of devotional service. The word Antardvipa consist of 2 words: Antar (means secret or inner reason) and Dvipa (means island). It was at this place that Lord Krishna revealed hi....

Yashoda mayi then went to perform her duties and Krishna began to plot to do something more mischievous. Krishna saw the Yamala Arjuna trees in the courtyard. These trees were ancient and gigantic with very deep roots.

They were the two sons of Kuvera who were cursed by Narada. Sukadev Goswami explains that Manigriva and Nalkuvera were very wealthy, beautiful, learned, famous, young and they became very proud of their opulences. Once in the...

हे महान् परमेश्वर, वे अपराधी व्यक्ति, जिनकी अंतःदृष्टि वाह्य भौतिकतावादी कार्यकलापों से अत्यधिक प्रभावित हो चुकी है वे आपके चरणकमलों का दर्शन नहीं कर सकते, किंतु आपके शुद्ध भक्त दर्शन कर पाते हैं, क्योंकि उनका एकमात्र उद्देश्य आपके कार्यकलापों का दिव्य भाव से अस्वादन करना है |
[SB: 3.5.45]
O great Supreme Lord, offensive persons whose internal vision has been too affected by external materialistic activities cannot see Your lotus feet, but they are seen by Your pure devotees,...

अतः कर्मफल में आसक्त हुए बिना मनुष्य को अपना कर्तव्य समझ कर निरन्तर कर्म करते रहना चाहिए क्योंकि अनासक्त होकर कर्म करने से परब्रह्म (परम) की प्राप्ति होती है |
Therefore, without being attached to the fruits of activities, one should act as a matter of duty; for by working without attachment, one attains the Supreme....

अपने चरणों में बैठा के
मेरे गम को दूर कर दो,
तुमसे जुदा ना हो पाऊँ
इतना मजबूर कर दो....
 

परन्तु जो मेरे परायण रहने वाले भक्तजन सम्पूर्ण कर्मों को मुझमें अर्पण करके मुझ सगुणरूप परमेश्वर को ही अनन्य भक्तियोग से निरन्तर चिन्तन करते हुए भजते हैं। हे अर्जुन! उन मुझमें चित्त लगाने वाले प्रेमी भक्तों का मैं शीघ्र ही मृत्यु रूप संसार-समुद्र से उद्धार करने वाला होता हूँ॥....

जीवन में सर्वोच्च लाभ की कामना करने वाले बड़े बड़े मुनि अपने उन हृदयों के भीतर सदैव आपके चरणकमलों का स्मरण करते हैं, जो आपके प्रेम में द्रवित हैं | इसी तरह आपके आत्ंसन्यमी भक्तगण,आपके ही समान ऐश्वर्य पाने के लिए स्वर्ग से परे जाने की इच्छा से, आपके चरणकमलों की पूजा प्रातः, दोपहर तथा संध्या समय करते हैं | आपके चरणकमल उस प्रज्ज्वलित अग्नि के तुल्य हैं, जो भौतिक इंद्रिय-तृप्ति विषयक समस्त इच्छाओं को भस्म कर देती है |
[SB: 11.6.10]