Article August 4, 2015

Prabhupada:
variyan esa te prasnah
krto loka-hitam nrpa
atmavit-sammatah pumsam
srotavyadisu yah parah
[SB 2.1.1]....

The gopīs were captivated by the sound vibration, which was not only attractive to them, but to all living creatures who heard it. One of the gopīs told her friends, “The highest perfection of the eyes is to see Kṛṣṇa and Balarāma entering the forest and playing Their flutes and tending the cows with Their friends.”
Persons who are constantly engaged in the transcendental meditation of seeing Kṛṣṇa, internally and externally, by thinking of ...

हे प्रभु, जो भक्तगण आपके चरणकमलों की दिव्य प्रेमाभक्ति में लगे हुए हैं उन्हें
धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष--इन चार पुरुषार्थों के क्षेत्र में कुछ भी प्राप्त करने में
कोई कठिनाई नहीं होती | परंतु हे भूमन, शुद्ध भक्त आपके चरणकमलों की प्रेमाभक्ति में ही अपने को लगाना श्रेयकर मानता है |....

श्रीविष्णु के लिए यज्ञ रूप में कर्म करना चाहिए, अन्यथा कर्म के द्वारा इस भौतिक जगत् में बन्धन उत्पन्न होता है | अतः हे कुन्तीपुत्र! उनकी प्रसन्नता के लिए अपने नियत कर्म करो | इस तरह तुम बन्धन से सदा मुक्त रहोगे |
Work done as a sacrifice for Viṣṇu has to be performed, otherwise work binds one to this material world. Therefore, O son of Kuntī, perform your prescribed duties for His satisfaction, and in that way you will always remain unattac...

दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारम्बार ।
तरुवर ज्यों पत्ती झड़े, बहुरि न लागे डार ॥

जो मुझको अजन्मा अर्थात्‌ वास्तव में जन्मरहित, अनादि (अनादि उसको कहते हैं जो आदि रहित हो एवं सबका कारण हो) और लोकों का महान्‌ ईश्वर तत्त्व से जानता है, वह मनुष्यों में ज्ञानवान्‌ पुरुष संपूर्ण पापों से मुक्त हो जाता है॥...

जो व्यक्ति आत्मा को जकड़कर रखने वाली मिथ्या अहंकार की गाँठ को तुरंत काट देने का इच्छुक होता है, उसे वैदिक ग्रंथों में प्राप्त अनुष्ठानों के द्वारा, भगवान केशव की पूजा करनी चाहिए | (11,3.47)....