Article August 3, 2015

Śrī Īśopaniṣad The knowledge that brings one nearer to the Supreme Personality of Godhead, Krishna
INVOCATION oṁ pūrṇam adaḥ pūrṇam idaṁ...

“When a person receives the seed of devotional service, he should take care of it by becoming a gardener and sowing the seed in his heart. If he waters the seed gradually by the process of śravaṇa and kīrtana [hearing and chanting], the seed will begin to sprout.
“As one waters the bhakti-latā-bīja, the seed sprouts, and the creeper gradually increases to the point where it penetrates the walls of this universe and goes beyon...

भगवान अपनी अंतरंगा शक्ति योगमाया के द्वारा मर्त्यलोक में प्रकट हुए | वे अपने नित्य रूप में आए जो उनकी लीलाओं के लिए उपयुक्त है | ये लीलाएं सबों के लिए आश्चर्यजनक थी, यहाँ तक कि उन लोगों के लिए भी जिन्हें अपने ऐश्वर्य का गर्व है, जिसमें बैकुंथपति के रूप में भगवान का स्वरूप भी सम्मिलित है | इस तरहा उनका (श्री कृष्ण का) दिव्य शरीर समस्त आभूषणों का आभूषण है |
The Lord appeared in the mortal world by His internal potency, y...

छीर रूप सतनाम है, नीर रूप व्यवहार ।
हंस रूप कोई साधु है, सत का छाननहार ॥
जबही नाम हिरदे घरा, भया पाप का नाश । ...

अपना नियत कर्म करो, क्योंकि कर्म न करने की अपेक्षा कर्म करना श्रेष्ठ है | कर्म के बिना तो शरीर-निर्वाह भी नहीं हो सकता |
Perform your prescribed duty, for action is better than inaction. A man cannot even maintain his physical body without work....

हे अर्जुन! पापयोनि चाण्डालादि जो कोई भी हों, वे भी मेरे शरण होकर परमगति को ही प्राप्त होते हैं॥ इसलिए तू सुखरहित और क्षणभंगुर इस मनुष्य शरीर को प्राप्त होकर निरंतर मेरा ही भजन कर॥ मुझमें मन वाला हो, मेरा भक्त बन, मेरा पूजन करने वाला हो, मुझको प्रणाम कर। इस प्रकार आत्मा को मुझमें नियुक्त करके मेरे परायण होकर तू मुझको ही प्राप्त होगा II
O son of Pṛthā, those who take shelter in Me, can approach the supreme destination.Engage your mind always in thinking of Me, offer obeisances and worship Me. Being completely absorbed in Me, surely you will come to Me.

यदि कोई अज्ञानी जिसने भौतिक इंद्रियों को वश में नहीं किया है, वह वैदिक आदेशों में अटल नहीं रहता, तो वह निश्च्य ही पापमय तथा अधार्मिक कार्यों में लिप्त रहेगा | इस तरहा उसको बारंबार जन्म-मृत्यु भोगना पड़ेगा |(SB:11.3.45)
तात्पर्य
भगवतगीता में भगवान कृष्ण ने अर्जुन द्वारा प्रतिनिधित्व करने वाले बद्धजीवों को जीवन के वास्तविक लक्ष्य के विषय में अद्भुत बातें बताई हैं | जो व्यक्ति इन उपदेशों में अपने मन को स्थिर नहीं कर पाता, उसे ऐसा भौतिकतावादी व्यक्ति मानना चाहिए, जो पापकर्मों मे...

The Spell of Illusion (Maya) by The Hare Krishna Movement in Bhagavad-gita, Maya Tags: 29, Bg 5, bhagavad-gita, external energy of Krsna, His Divine Grace A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada, illusion, Krishna, maya, perfection of life, perfeection of yoga
The sense of a separated existence from Kṛṣṇa is called māyā (mā-not, yā-this)....

So this Bhāgavata discourse is meant for giving enlightenment to the people of the world. It is not a sectarian religion; it is meant for all human beings. They should take advantage of the instruction of Śrīmad-Bhāgavatam, Bhagavad-gītā, and make their life perfect. That is our Kṛṣṇa consciousness movement.
Śrīmad-Bhāgavatam Lecture
Given by His Divine Grace A. C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada...