निष्काम भक्ति

 

एक बार एक बहुत ही पहुंचे हुए संत महात्मा बीमार हो गए, काफी वेध हकीम उनके इलाज कर चुके पर उनको आराम नही हुआ ।*
*उनके एक बहुत ही प्रिय शिष्य तो उनके चरणो में हताश हो कर बैठ गया । महात्मा ने उसकी और प्रेम से देखा और कहा निराशा न हो पुत्र सब ठीक हो जायेगा ।*
*लेकिन वो शिष्य बोला प्रभु आप तो सर्व शक्तिमान हो, सर्व ज्ञाता हो । आप तो सब कुछ जानते हो । फिर आप क्यों नि उस परमात्मा से फरियाद करते हो कि वो आपको ठीक कर दे ।*
*इस पर महात्मा मुस्कुरा कर बोले पुत्र, क्या प्रभु को मेरी इस अवस्था का ज्ञान नही हैं ।*
*क्या मेरी ये अवस्था उसकी मर्जी के बिना हैं ।*
*तो में उसकी मर्जी में क्यों विघन डालूं ।*
*जरुर किसी बुरे करम का भुगतान करवाया जा रहा हैं । जब भुगतान हो जायेगा तो वो बीमारी भी खुद ठीक कर देगा ।*
*इंसान को विवेक से काम लेना चाहिए । प्रभु जो करा हैं सब अच्छे के लिए ही करता हैं।*

 

*।। श्रीराम: शरणम ।।*

 

 

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