कर्म के मोती

 

कर्म के मोती

 
मुख्यतः दो प्रकार के कर्मों को शास्त्रों में विवेचित किया गया है। एक अज्ञान से उत्पन्न हुआ कर्म जो हम प्राय करते रहते हैं। भगवान श्री कृष्ण ने गीता में ज्ञान से उत्पन्न हुआ कर्म और अज्ञान से उत्पन्न हुए कर्म की वृह्द रूप से विवेचना की है। अज्ञान से उत्पन्न हुआ वह कर्म है जिसमें कर्तापन और अहंकार मौजूद रहता है। जिसमें हम कहते हैं कि यह कर्म मैं कर रहा हूं, यानि अहंकार की प्रदानता। जिसमें कर्तापन का अभिमान हो वह कर्म अज्ञान से उत्पन्न हुआ कर्म माना जाता है। जिसमें कि मैं नहीं होता यानि कर्तापन नहीं होता, यानि यहां अहंकार नहीं होता। जिसमें कर्ता परमात्मा ही होता है।.
 
 
हर कर्म परमात्मा द्वारा किया जा रहा है। अर्थात मैं तो निमित्त मात्ऱ हूं। जब यह भाव कर्ता के अंदर होता है, जो भी कर्म हो रहा है वह परमात्मा द्वारा किया जा रहा है। ऐसा भाव जब कर्ता के अंदर होता है तो वह ज्ञान से उत्पन्न हुआ कर्म है। उसमें अहंकार नहीं होता। यह ध्यान देने योग्य बात है कि अहंकार व अज्ञान एक ही संयुक्त घटना हैं। जहां अज्ञान है वही अहंकार है और जहां अहंकार है वहीं अज्ञान है। यह दोनों अलग-अलग नहीं हो सकते। ऐसा कदापि नहीं हो सकता कि अहंकार चला जाए और अज्ञान रह जाए। ज्ञान और निर-अहंकार यह भी संयुक्त घटना हैं। जहां ज्ञान होगा वहां निर-अहंकारता अवश्य होगी।
 
 
जहां ज्ञान होगा वहीं कर्ता परमात्मा होगा। अर्थात ज्ञान का मतलब प्रकाश और अज्ञान का मतलब अंधकार से है। अर्थात ज्ञान ब्रह्म और अज्ञान पदार्थ है। जब हम अहंकार से भरे होते हैं तो जीवन में जो भी कर्म हमारे द्वारा किया जाता है वह कर्म अज्ञान से ही किया हुआ कर्म है। अज्ञान से निकले हुए कर्म की पहचान यह है कि जिस कर्म से बंधन पैदा हो जाए, जिस कर्म से संताप पैदा हो, दुख पैदा हो पीड़ा पैदा हो वह कर्म अज्ञान से निकला हुआ जानना चाहिए। जिस कर्म से जीवन में सुख-शांति, सम्पन्नता, आनंद, प्रेम पैदा होता है उस कर्म को ज्ञान से निकला हुआ माना जानना चाहिए। कर्म ज्ञान से हुआ तभी होगा जब अहंकार नहीं हो। तब फिर परमात्मा ही है।
 
अहंकार की अनुपस्थिती परमात्मा की उपस्थिती बन जाती है। जिस दिन हमारा मैं मिटता है उसी दिन हमारे भीतर वह प्रकट हो जाता है। जब तक हम मजबूती से मैं को पकड़े रहते हैं तब तक परमात्मा को हमारे भीतर प्रवेश करने की जगह नहीं मिलती। जिस दिन हमारा मैं मिटता है

 

 

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