Gita Saar

 

भगवद् भक्ति में शुद्धता का होना अति आवश्यक है, शुद्धता दो प्रकार की होती है बाहरी और आंतरिक शुद्धता | बाहरी शुद्धता का अभिप्राय शरीर की शुद्धता है तथा आंतरिक शुद्धता के लिए मनुष्य को कृष्ण का चिंतन निरंतर करना चाहिए जो की हमारे पूर्व जन्मों के पापों को नष्ट करता है और हमारी इंद्रियों को शुद्ध करता है | इस प्रकार हमारी आसक्ति विषयासक्त मनुष्यों के समुदाय में नहीं रहती |
Cleanliness is essential for making advancement in spiritual life. There are two kinds of cleanliness: external and internal. External cleanliness means taking a bath, but for internal cleanliness one has to think of Krishna always and chant Hare Krishna, Hare Krishna, Krishna Krishna, Hare Hare/ Hare Rama, Hare Rama, Rama Rama, Hare Hare. This process cleans the accumulated dust of past karma from the mind.

 

Recent Post

Today's Most Popular

All Time Most Popular