Gita Saar

 

श्री कृष्ण : हे अर्जुन ,सब कर्मों को मन से मुझमें अर्पण करके तथा समबुद्धि रूप योग को अवलंबन करके मेरे परायण और निरंतर मुझमें चित्तवाला हो॥
उपर्युक्त प्रकार से मुझमें चित्तवाला होकर तू मेरी कृपा से समस्त संकटों को अनायास ही पार कर जाएगा और यदि अहंकार के कारण मेरे वचनों को न सुनेगा तो नष्ट हो जाएगा अर्थात परमार्थ से भ्रष्ट हो जाएगा॥

In all activities just depend upon Me and work always under My protection. In such devotional service, be fully conscious of Me.
If you become conscious of Me, you will pass over all the obstacles of conditional life by My grace. If, however, you do not work in such consciousness but act through false ego, not hearing Me, you will be lost.

 

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