Gita Saar

 

हे अर्जुन! मैं सब भूतों के हृदय में स्थित सबका आत्मा हूँ तथा संपूर्ण भूतों का आदि, मध्य और अंत भी मैं ही हूँ॥मैं सबका नाश करने वाला मृत्यु और उत्पन्न होने वालों का उत्पत्ति हेतु हूँ तथा स्त्रियों में कीर्ति, श्री, वाक्‌, स्मृति, मेधा, धृति और क्षमा हूँ॥
I am the Self, O Guḍākeśa, seated in the hearts of all creatures. I am the beginning, the middle and the end of all beings.
I am all-devouring death, and I am the generator of all things yet to be. Among women I am fame, fortune, speech, memory, intelligence, faithfulness and patience.

 

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