Guru Ji

 

आया था किस काम को किया कौन सा काम,
भूल गये भगवान को कमा रहे धनधाम,
कमा रहे धनधाम रोज उठ कर लबारी,
झूट कपट का जोड़ बने तुम माया धारी,
कहते दस कबीर साहेब की सूरत बिसारी,
मालिक के दरबार मिले तुमको दुख भारी |

 

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