Gita Saar

 

हे भरतवंशियों में श्रेष्ठ अर्जुन! चार प्रकार के भक्तजन मुझको भजते हैं॥
1. उत्तम कर्म करने वाले अर्थार्थी (सांसारिक पदार्थों के लिए भजने वाला),
2. आर्त (संकटनिवारण के लिए भजने वाला)
3. जिज्ञासु (मेरे को यथार्थ रूप से जानने की इच्छा से भजने वाला) और
4. ज्ञानी
उनमें नित्य मुझमें एकीभाव से स्थित अनन्य प्रेमभक्ति वाला ज्ञानी भक्त अति उत्तम है क्योंकि मुझको तत्व से जानने वाले ज्ञानी को मैं अत्यन्त प्रिय हूँ और वह ज्ञानी मुझे अत्यन्त प्रिय है॥
O best among the Bhāratas [Arjuna], four kinds of pious men render devotional service unto Me-1.the distressed,2. the desirer of wealth,3. the inquisitive, and 4.he who is searching for knowledge of the Absolute.
Of these, the wise one who is in full knowledge in union with Me through pure devotional service is the best. For I am very dear to him, and he is dear to Me.

 

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